ब्रह्मर्षि पितामह पत्रीजी का जन्मदिन
जन्मदिन हो आपका दीपमय पर्व,
जहाँ आत्मा गाए प्रभु का सुस्वर।
हो जीवन में ज्ञान और संकल्प का श्वास,
मन में बसी हो ध्यान की फुलवारी।
ईश्वर से जुड़ा हर एक तेरा क्षण,
जन्म ले हर दिन नई चेतना बन।
केक के साथ हो राम का नाम,
तोहफ़ों के बीच मिले सच्चा धाम।
भविष्य की ओर देख तू साहस से,
प्रभु की कृपा रहे तुझ पर हर साँस में।
गुरु का आशीर्वाद बने तेरा कवच,
कर्तव्य में रहे ईमानदारी का रथ।
ईश्वर तेरे मन में वास करे,
सत्य, सेवा और प्रेम का प्रकाश भरे।
यह केवल सुंदर उपहार नहीं है,
बल्कि आध्यात्मिक आशीर्वाद का प्रतीक भी है।
यह कविता मास्टर वासंती कोरवी जी को मास्टर शिल्पा मैडम की चैनलिंग के माध्यम से प्राप्त हुई है।
दिव्य संदेश का महत्व
यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं—
यह एक स्पंदन है, एक तरंग है,
जो 11 नवंबर की उस पवित्र ऊर्जा में उतरकर आई
जब पितामह पत्रीजी का जन्मदिवस मनाया जा रहा था।
इस संदेश में साधक के जीवन पथ के लिए
ईश्वर-संलग्नता, ध्यान, संकल्प, साहस, सत्य और प्रेम
सब एक साथ प्रवाहित होते हैं।
