हर आत्मा अपनी दिव्य योजना पर चल रही है।
किसी को न आँकें — सभी दिव्य हैं।
‘मैं ही श्रेष्ठ हूँ’ — इस अहंकार को छोड़ दीजिए, यह मार्ग की बाधा है।
कछुए की तरह शांत, संतुलित और सजग बनें।
जब जीवन में हलचल हो, बाहर नहीं — भीतर लौटें।
हर अनुभव कोई न कोई शिक्षा लेकर आता है — समर्पण और सजगता से उसे स्वीकारें।
आप पूर्ण हैं। आपकी ऊर्जा दिव्यता की ओर बढ़ने को तैयार है।
– शिल्पा माने
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