बाबाजी की दिव्य अनुकंपा से, गुरु माँ शिल्पा माने जी के माध्यम से क्रीया योग दीक्षा का यह पावन कार्यक्रम 21 जनवरी 2026 को पुणे स्थित श्री श्री आनंदमयी माँ हॉल, पुणे में अत्यंत शांत, पवित्र एवं ऊर्जामय वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि आत्मा के जागरण की एक दिव्य यात्रा थी — जहाँ साधकों ने भीतर की शांति, चेतना और गुरु कृपा का सजीव अनुभव किया।
क्रीया योग क्या है?
क्रीया योग कोई साधारण ध्यान पद्धति नहीं है। यह एक प्राचीन, वैज्ञानिक एवं पूर्ण आत्मिक साधना मार्ग है,
जिसका उद्देश्य है —
- आत्मा की शुद्धि
- कर्मों के बंधन से मुक्ति
- चेतना का उच्च स्तर पर उत्थान
- ईश्वर से प्रत्यक्ष अनुभवात्मक जुड़ाव
इस साधना में श्वास और ध्यान के माध्यम से रीढ़ की हड्डी में प्रवाहित प्राण शक्ति को जागृत किया जाता है,
जिससे चेतना धीरे-धीरे ऊँचे स्तर पर उठने लगती है। जब श्वास शांत होती है, तो मन भी शांत हो जाता है और भीतर गहरी शांति का अनुभव होने लगता है।
क्रिया योग की गुरु परंपरा
“गुरु परंपरा” का अर्थ है —
यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी योग्य गुरुओं के माध्यम से सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया गया है।
क्रिया योग एक गुरु-शिष्य परंपरा से चलने वाली विद्या है। क्रिया योग कोई नई पद्धति नहीं है।
यह एक हजारों वर्षों पुरानी विद्या है, जिसका पुनरुद्धार महावतार बाबाजी ने किया।
- महावतार बाबाजी – इसका पुनरुद्धार महावतार बाबाजी द्वारा किया गया, जिन्होंने 1861 में यह विद्या श्री लाहिड़ी महाशयजी को प्रदान की।
- श्री लाहिड़ी महाशय – गृहस्थ जीवन में रहकर क्रिया योग का प्रसार
- स्वामी श्री श्री युक्तेश्वर गिरि – उच्च आध्यात्मिक मार्गदर्शक
- परमहंस योगानंदजी – जिन्होंने इस विद्या को विश्वभर में पहुँचाया, परमहंस योगानंद जी की पुस्तक ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ अ योगी ने क्रिया योग को वैश्विक पहचान दिलाई।
आज भी यह दिव्य ज्ञान गुरु परंपरा के माध्यम से साधकों तक पहुँच रहा है।
क्रिया योग का महत्व
क्रिया योग केवल ध्यान की तकनीक नहीं, बल्कि जीवन को भीतर से बदलने की साधना है।
नियमित क्रीया योग अभ्यास से —
- मन की चंचलता शांत होती है
- तनाव, भय और नकारात्मकता कम होती है
- एकाग्रता और आत्मबल बढ़ता है
- शरीर-मन-आत्मा में संतुलन आता है
- जीवन में स्पष्टता और दिशा मिलती है
सबसे महत्वपूर्ण —
???? आत्मा स्वयं गुरु से जुड़ने लगती है।
योगानंद जी के अनुसार, प्रतिदिन थोड़े समय का सही क्रिया अभ्यास दीर्घकालीन आध्यात्मिक उन्नति के समान फल देता है। क्योंकि यह ऊर्जा आधारित साधना है, इसलिए क्रिया योग गुरु द्वारा दीक्षा के माध्यम से ही सीखा जाना चाहिए।
क्रीया योग साधना में हमें क्या करना चाहिए?
क्रीया योग दीक्षा के बाद साधक को चाहिए —
- प्रतिदिन नियमित अभ्यास
- गुरु द्वारा बताए गए नियमों का पालन
- संयम, शुद्ध आहार और सकारात्मक जीवनशैली
- धैर्य और श्रद्धा के साथ साधना
क्रीया योग “जल्दी परिणाम” का मार्ग नहीं, बल्कि स्थायी आत्मिक परिवर्तन का मार्ग है।
गुरु माँ शिल्पा माने जी के माध्यम से दीक्षा
बाबाजी की दिव्य अनुकंपा से,गुरु माँ शिल्पा माने जी के माध्यम से 21 जनवरी 2026 को पुणे स्थित श्री श्री आनंदमयी माँ हॉल में क्रिया योग दीक्षा प्रदान की गई। इस आयोजन में साधकों ने गहरी शांति, ध्यान और ऊर्जा का अनुभव किया। यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अनेक आत्माओं के लिए आत्मिक यात्रा की नई शुरुआत बना।
गुरु माँ की उपस्थिति में —
- वातावरण स्वतः ही ध्यानमय हो गया
- साधकों ने गहन शांति एवं कंपन का अनुभव किया
- कई साधकों को भीतर से दिव्य संकेत एवं अनुभूतियाँ प्राप्त हुईं
यह दीक्षा केवल तकनीक नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य के आत्मिक संबंध की स्थापना थी।
यह आयोजन इस बात का साक्ष्य है कि —
जब गुरु कृपा उतरती है, तो साधक का जीवन बदलने लगता है।
आगामी क्रीया योग दीक्षा एवं कार्यक्रम
अगली क्रीया योग दीक्षा 15 मार्च 2026 को पुणे में आयोजित की जा रही है।
इच्छुक साधक नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं:
???? 15 मार्च 2026 क्रीया योग दीक्षा के लिए पंजीकरण करें
क्रीया योग दीक्षा एक पवित्र, गोपनीय एवं अनुशासित साधना मार्ग है।
कृपया केवल वही साधक पंजीकरण करें जो गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ इस मार्ग पर चलने के लिए तैयार हों।
