Master Chitra

आत्मवंदन, मास्टरगण, शिल्पा मैम और भारती मैम। कल के सत्र की ऊर्जा अत्यंत प्रबल थी। परसों जब मैं ध्यान में बैठी, तो मैं आगे की…

आत्मवंदन, मास्टरगण, शिल्पा मैम और भारती मैम।

कल के सत्र की ऊर्जा अत्यंत प्रबल थी। परसों जब मैं ध्यान में बैठी, तो मैं आगे की ओर ज़मीन पर झुक गई और ऐसा अनुभव हुआ जैसे मैं कहीं चली गई हूँ। मेरी स्थिति बिल्कुल वैसी थी जैसे कोई बटन स्विच ऑफ हो गया हो।

लगभग 11:15 बजे मेरे भाई को लगा कि मैं वहीं सो गई हूँ, इसलिए उसने मुझे उठाने के लिए हाथ लगाया। जैसे ही उसने मुझे छुआ, मैं ज़ोर से चिल्लाई और पुनः गहरे ध्यान में चली गई। कुछ समय बाद मैं बहुत कठिनाई से ध्यान से बाहर आई। मैं स्वयं अपनी इस अवस्था से डर गई थी। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं इस प्रकार की प्रतिक्रिया दे सकती हूँ।

परसों मैंने बाबाजी से प्रार्थना की थी कि वे मुझे बताएं कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा है। कल सत्र में मैं आपसे यह पूछना चाहती थी, पर हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। मुझे बहुत बुरा लग रहा था कि मैं बोल भी नहीं पा रही हूँ, और मैंने मन ही मन सोचा कि शायद पूछ नहीं पाऊँगी।

पर उसी समय दो अन्य मास्टर्स ने लगभग यही अनुभव साझा किया। तब मुझे समझ आया कि यह स्थिति केवल मेरे साथ ही नहीं हो रही है, इसलिए डरने की कोई बात नहीं है। मुझे अपने प्रश्न का उत्तर स्वयं ही मिल गया।

मुझे बार-बार यह अनुभव होता है कि यह कितना दिव्य समूह है। ❤️
मास्टर्स और बाबाजी हमारे उन प्रश्नों के भी उत्तर दे देते हैं, जिन्हें हम पूछ भी नहीं पाते।

मैं स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानती हूँ कि आप सभी, यह समूह और ये सभी दिव्य गुरु मेरे जीवन में उपस्थित हैं।
बाबाजी, सभी गुरुओं, शिल्पा मैम और भारती मैम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद।
हार्दिक आभार। ????????????????????????

– यह अनुभव साधक द्वारा उनके व्यक्तिगत ध्यान-अनुभव के रूप में साझा किया गया है।