गुरु कृपा की आवश्यकता है।
आरंभ में व्यक्तिगत गुरु की आवश्यकता है।
ईश्वर प्राप्ति का मार्ग वही दिखता है,
जो गुरु गुरुओं का गुरु है।
आत्म-साक्षात्कार एक अनुभव है।
श्रद्धा और विश्वास रखकर
आध्यात्मिक मार्ग में आगे जाना है।
शिष्य के लिए गुरु की कृपा आवश्यक है।
गुरु ही अपने आप उसे समाधि में पहुँचा देता है।
वह साधक का पथ-प्रदर्शन करता है।
शंकाओं का निवारण करता है।
अपने साधक को, स्वयं साधक ही चलना
और मार्ग पर कदम रखकर चलना सिखाता है।
