Master Devsena

आज तो ये सिद्ध हो गया कि हम सभी एक ही तत्व से हैं — “तत् त्वं असि।”इसीलिए बार-बार एक रूप में दूसरा रूप भासित…

आज तो ये सिद्ध हो गया कि हम सभी एक ही तत्व से हैं — “तत् त्वं असि।”
इसीलिए बार-बार एक रूप में दूसरा रूप भासित हो रहा है। कोई तो गुरु-तत्व है जो लघु सी पड़ी चेतना को ऊर्ध्वगामी बनने के लिए प्रेरित कर रहा है — वह हमारा आत्म तत्व ही है।
जो भी अन्तर या विवर्त है, वह हमारे मन, बुद्धि और अहंकार का सृजन मात्र है, जो ब्रह्म या शून्य से दूर होने का आभास देता है। और हम सभी अलग-अलग individual identity पर तैरने लगते हैं — जैसा कि प्रकृति माता का ब्लूप्रिंट होता है।
जब-जब आत्मनों में आत्मसाक्षात्कार की तीव्र वृत्ति उत्पन्न होती है, तब-तब देवरा बाबा, लाहिड़ी बाबा, शिवानंद बाबा, योगानंद जी, पितामह पैट्रिजी, श्री श्री, और अब हम सभी के बीच शिल्पा माँ जैसे दिव्य ज्योति स्वरूपों को भेज दिया जाता है। ये अनंत कृपा है आदि योगी और आदि शक्ति की।
और फिर वे मुमुक्षु आत्माओं को अपने चौपड़ पासे के खेल से मुक्त कर देते हैं…

हार्दिक प्रेम और आनंद के साथ शिल्पा मैम को आभार, अभिनंदन और बहुत सारा Gratitude ????????